शाम जब सिमटी हुई सी लगती है,
सर्द हवाएं जब धुल उड़ाने लगती है,
उस अँधेरे उजाले के आँख मिचौली में,
पुराने दोस्त याद आ जाते हैं ।
वो बीते पल ,
कुछ हसींन कुछ गंमगीन,
यारों का वो लड़कपन,
कुछ सादगी कुछ रंगीन ।
आज मै इस भरी महेफिल मे
न जाने किसे ढूंड रहा हूँ ,
चहरे पर मुस्कान लिए,
हज़ारों मे भी अकेला हूँ ।
कहाँ है वो दोस्त मेरे
जिनके साथ दर्द भी मज़ा दे जाती थी
यारों का काफिला कैसे छूट गया,
जो अमावस को दिवाली कर जाती थी ।
दिल कहेता है चीत्कार कर पुकार लूँ ,
उन्हें अपने साए में समेट लूँ ।
यादों से अब दिल नहीं भरता मेरा ,
एक बार फिर उन्हें सीने से लगा लूँ ॥
सर्द हवाएं जब धुल उड़ाने लगती है,
उस अँधेरे उजाले के आँख मिचौली में,
पुराने दोस्त याद आ जाते हैं ।
वो बीते पल ,
कुछ हसींन कुछ गंमगीन,
यारों का वो लड़कपन,
कुछ सादगी कुछ रंगीन ।
आज मै इस भरी महेफिल मे
न जाने किसे ढूंड रहा हूँ ,
चहरे पर मुस्कान लिए,
हज़ारों मे भी अकेला हूँ ।
कहाँ है वो दोस्त मेरे
जिनके साथ दर्द भी मज़ा दे जाती थी
यारों का काफिला कैसे छूट गया,
जो अमावस को दिवाली कर जाती थी ।
दिल कहेता है चीत्कार कर पुकार लूँ ,
उन्हें अपने साए में समेट लूँ ।
यादों से अब दिल नहीं भरता मेरा ,
एक बार फिर उन्हें सीने से लगा लूँ ॥