May 20, 2013

इस बार, रो दिए हम


दर्द सीने मे उठा था जब 
महेसूस हुआ खोने का गम।
जब और सह न सके 
तो रो दिए हम।

जब भी तू उदास हुई थी,
संम्भाला था मैंने हर बार,
पैर मेरे आंसू पे जब तू मुस्कुराई 
क्या करते, रो दिए हम।

हर सांस तेरे नाम कर चूका था।
जो भी था सब तेरा ही तो था।
अब  टुकड़ों को तरस रही है तु,
देखा न गया मुझसे, रो दिए हम।

नहीं जगा  तेरे दिल मे वो कशिश,
ठीक है।
पर जब मेरे वफ़ा का सौदा किया तूने,
मुस्कुरा कर, रो दिए हम।।

May 19, 2013

ज़िन्दगी ने रुख बदला

सारी  रात जगा था उसके सिरहाने,
टूटकर  मोहब्बत की थी मैंने।
फिर ज़िन्दगी ने रुख बदला,
दिल से दिल का रिश्ता टूटा।

 ज़िन्दगी की जो मंजिल बन गई थी,
तूफानों में जिस साहिल का तलाश था, 
वक़्त ने फिर ऐसा रुख बदला,
लहेरों से ही मैंने नाता जोड़ा।

उसे मानाने की ऐसी लत लगी,
ज़िन्दगी भी मुझसे रूठ गई।
किस्मत ने फिर ऐसा रिख बदला,
गमो से ही मई मोहब्बत कर बैठा।

यकीन था मुझे की,
मोहब्बत की होगी जीत।
पर मेरे यार ने ऐसे रुख बदला,
हसरत नफरत में बदल गया।


May 17, 2013

मै शायरी भूल जाता हूँ

जिस नाम से मेरे दिल को सुकून मिला 
उस मुस्कान तक मई पहुँच न सका।
उसकी तौहिन् क डर से ऐ दोस्तों 
मै खुलकर रो भी न सका।

नहीं कह सका उसे 
सिने से लिपटकर रोने का मन करता है।
तुम्हारी बाते ही तो 
मेरे बेचैन दिल की  रहत है।

नहीं कह सका उसे 
और कोई नहीं जचता मुझको।
बस येही गुज़ारिश है की 
गम मेरे और खुशियाँ तुम्हारी हो।

उसे भूलने का वादा किया था मैंने , कोशिश भी बहुत की।
पैर दोस्तों दिल का गुन्हेगार हूँ
आज भी महेफिल में जब आती है वो 
मै अपनी शायरी भूल जाता हूँ।।

March 23, 2013

EK Nazm, Doston k Naam

शाम जब सिमटी हुई सी लगती है,
सर्द हवाएं जब धुल उड़ाने लगती है,
उस अँधेरे उजाले के आँख मिचौली में,
पुराने दोस्त याद आ जाते हैं ।

वो बीते पल ,
कुछ हसींन कुछ गंमगीन,
यारों का वो लड़कपन,
कुछ सादगी कुछ रंगीन ।

आज मै इस भरी महेफिल मे
न जाने किसे ढूंड रहा हूँ ,
चहरे पर मुस्कान लिए,
हज़ारों मे भी अकेला हूँ ।

कहाँ है वो दोस्त मेरे
जिनके साथ दर्द भी मज़ा दे जाती थी 
यारों का काफिला कैसे छूट गया,
जो  अमावस को दिवाली कर जाती थी  ।

दिल कहेता है चीत्कार कर पुकार लूँ ,
उन्हें अपने साए में समेट लूँ ।
यादों से अब दिल नहीं भरता मेरा ,
एक बार फिर उन्हें सीने से लगा लूँ ॥