May 19, 2013

ज़िन्दगी ने रुख बदला

सारी  रात जगा था उसके सिरहाने,
टूटकर  मोहब्बत की थी मैंने।
फिर ज़िन्दगी ने रुख बदला,
दिल से दिल का रिश्ता टूटा।

 ज़िन्दगी की जो मंजिल बन गई थी,
तूफानों में जिस साहिल का तलाश था, 
वक़्त ने फिर ऐसा रुख बदला,
लहेरों से ही मैंने नाता जोड़ा।

उसे मानाने की ऐसी लत लगी,
ज़िन्दगी भी मुझसे रूठ गई।
किस्मत ने फिर ऐसा रिख बदला,
गमो से ही मई मोहब्बत कर बैठा।

यकीन था मुझे की,
मोहब्बत की होगी जीत।
पर मेरे यार ने ऐसे रुख बदला,
हसरत नफरत में बदल गया।


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