दर्द सीने मे उठा था जब
महेसूस हुआ खोने का गम।
जब और सह न सके
तो रो दिए हम।
जब भी तू उदास हुई थी,
संम्भाला था मैंने हर बार,
पैर मेरे आंसू पे जब तू मुस्कुराई
क्या करते, रो दिए हम।
हर सांस तेरे नाम कर चूका था।
जो भी था सब तेरा ही तो था।
अब टुकड़ों को तरस रही है तु,
देखा न गया मुझसे, रो दिए हम।
नहीं जगा तेरे दिल मे वो कशिश,
ठीक है।
पर जब मेरे वफ़ा का सौदा किया तूने,
मुस्कुरा कर, रो दिए हम।।
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