March 23, 2013

EK Nazm, Doston k Naam

शाम जब सिमटी हुई सी लगती है,
सर्द हवाएं जब धुल उड़ाने लगती है,
उस अँधेरे उजाले के आँख मिचौली में,
पुराने दोस्त याद आ जाते हैं ।

वो बीते पल ,
कुछ हसींन कुछ गंमगीन,
यारों का वो लड़कपन,
कुछ सादगी कुछ रंगीन ।

आज मै इस भरी महेफिल मे
न जाने किसे ढूंड रहा हूँ ,
चहरे पर मुस्कान लिए,
हज़ारों मे भी अकेला हूँ ।

कहाँ है वो दोस्त मेरे
जिनके साथ दर्द भी मज़ा दे जाती थी 
यारों का काफिला कैसे छूट गया,
जो  अमावस को दिवाली कर जाती थी  ।

दिल कहेता है चीत्कार कर पुकार लूँ ,
उन्हें अपने साए में समेट लूँ ।
यादों से अब दिल नहीं भरता मेरा ,
एक बार फिर उन्हें सीने से लगा लूँ ॥

 

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