May 17, 2013

मै शायरी भूल जाता हूँ

जिस नाम से मेरे दिल को सुकून मिला 
उस मुस्कान तक मई पहुँच न सका।
उसकी तौहिन् क डर से ऐ दोस्तों 
मै खुलकर रो भी न सका।

नहीं कह सका उसे 
सिने से लिपटकर रोने का मन करता है।
तुम्हारी बाते ही तो 
मेरे बेचैन दिल की  रहत है।

नहीं कह सका उसे 
और कोई नहीं जचता मुझको।
बस येही गुज़ारिश है की 
गम मेरे और खुशियाँ तुम्हारी हो।

उसे भूलने का वादा किया था मैंने , कोशिश भी बहुत की।
पैर दोस्तों दिल का गुन्हेगार हूँ
आज भी महेफिल में जब आती है वो 
मै अपनी शायरी भूल जाता हूँ।।

7 comments:

  1. Kya baat sir.. well said : Dwarkesh

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  2. KISI KI MOHABBAT SE HUMNE KYA PAAYA HAI
    RAAT KI NEEND AUR DIN KA CHEYN GAVAAYA HAI
    KYA KARE HUM ISS DIL KA
    JISSE AAJ BARBAAD HO KAR BHI HOSH NAHIN AAYA HAI

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  3. Aap shayar to nahiiiiiiiiii!!!!! Fir bhi itni achi shayari :O !!!

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