जिस नाम से मेरे दिल को सुकून मिला
उस मुस्कान तक मई पहुँच न सका।
उसकी तौहिन् क डर से ऐ दोस्तों
मै खुलकर रो भी न सका।
नहीं कह सका उसे
सिने से लिपटकर रोने का मन करता है।
तुम्हारी बाते ही तो
मेरे बेचैन दिल की रहत है।
नहीं कह सका उसे
और कोई नहीं जचता मुझको।
बस येही गुज़ारिश है की
गम मेरे और खुशियाँ तुम्हारी हो।
उसे भूलने का वादा किया था मैंने , कोशिश भी बहुत की।
पैर दोस्तों दिल का गुन्हेगार हूँ
आज भी महेफिल में जब आती है वो
मै अपनी शायरी भूल जाता हूँ।।
उस मुस्कान तक मई पहुँच न सका।
उसकी तौहिन् क डर से ऐ दोस्तों
मै खुलकर रो भी न सका।
नहीं कह सका उसे
सिने से लिपटकर रोने का मन करता है।
तुम्हारी बाते ही तो
मेरे बेचैन दिल की रहत है।
नहीं कह सका उसे
और कोई नहीं जचता मुझको।
बस येही गुज़ारिश है की
गम मेरे और खुशियाँ तुम्हारी हो।
उसे भूलने का वादा किया था मैंने , कोशिश भी बहुत की।
पैर दोस्तों दिल का गुन्हेगार हूँ
आज भी महेफिल में जब आती है वो
मै अपनी शायरी भूल जाता हूँ।।
Kya baat sir.. well said : Dwarkesh
ReplyDelete:) Bass .. yun hi .... aur bhi hain
Deletewah wah kya baat hai....
ReplyDeleteKISI KI MOHABBAT SE HUMNE KYA PAAYA HAI
ReplyDeleteRAAT KI NEEND AUR DIN KA CHEYN GAVAAYA HAI
KYA KARE HUM ISS DIL KA
JISSE AAJ BARBAAD HO KAR BHI HOSH NAHIN AAYA HAI
Chaa gaye yara .... super!
DeleteAap shayar to nahiiiiiiiiii!!!!! Fir bhi itni achi shayari :O !!!
ReplyDeleteSanto....shayari bhul jo gaya :)
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